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यूपी में एम्स दिल्ली की तर्ज पर ‘एनसीए भवन’ बनाने की मांग, बुजुर्गों को एक ही छत के नीचे मिलेंगे सभी इलाज

Newsbyline.com

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने एक बड़ी पहल की है। परिषद के अध्यक्ष इंजीनियर हरिकिशोर तिवारी ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को पत्र भेजकर दिल्ली एम्स की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ (NCA) भवन स्थापित करने की मांग की है।

इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत् प्रकाश नड्डा, स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव को भी ज्ञापन प्रेषित किया है।

बुजुर्गों को भटकने से मिलेगी मुक्ति परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि हाल ही में प्रदेश सरकार ने 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़कर सराहनीय कदम उठाया है। वर्तमान में बीपीएल परिवार, राज्य कर्मचारी, शिक्षक एवं अन्य संविदा कर्मी इस योजना के दायरे में हैं। हालांकि, मरीजों की भारी संख्या के कारण अस्पतालों में मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्थाएं कम पड़ रही हैं। विशेषकर 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग मरीजों को इलाज के लिए एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं।

एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सुविधाएं दिल्ली एम्स स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां वृद्धजनों के लिए एक समर्पित बहुमंजिला रिसर्च एंड ट्रीटमेंट सेंटर कार्यरत है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख संस्थानों—जैसे एसजीपीजीआई (SGPGI), डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान, केजीएमयू और प्रदेश के एम्स (गोरखपुर व रायबरेली)—में भी इसी मॉडल पर एनसीए भवन बनाए जाने चाहिए।

एनसीए भवन की प्रमुख विशेषताएं:

  • सिंगल विंडो जेरियाट्रिक केयर: बुजुर्गों को मानसिक रोग, आर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी और सर्जरी जैसी सभी सुपर-स्पेशलिटी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
  • विशेष इलाज व्यवस्था: डिमेंशिया (भूलने की बीमारी), अल्जाइमर और सुनने की समस्या से पीड़ित बुजुर्गों के लिए विशेष देखभाल कक्ष।
  • रिसर्च और ट्रेनिंग: उम्र बढ़ने के वैज्ञानिक कारणों, वृद्धावस्था की बीमारियों पर शोध और डॉक्टरों की विशेष ट्रेनिंग के साथ 200 बेड का आरक्षित वार्ड।

परिषद का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश के लाखों वरिष्ठ नागरिकों को बुढ़ापे में सम्मानजनक और बाधा-रहित इलाज मिल सकेगा।

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